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Coronavirus: JEE Main May 2021 Exam Postponed check details – JEE Main May 2021 Postponed: कोरोना के चलते जेईई मेन मई सत्र की परीक्षा स्थगित, शिक्षा मंत्री ने किया ऐलान

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Coronavirus: JEE Main May 2021 Exam Postponed check details – JEE Main May 2021 Postponed: कोरोना के चलते जेईई मेन मई सत्र की परीक्षा स्थगित, शिक्षा मंत्री ने किया ऐलान


Coronavirus: JEE Main May 2021 Exam Postponed check details – JEE Main May 2021 Postponed: कोरोना के चलते जेईई मेन मई सत्र की परीक्षा स्थगित, शिक्षा मंत्री ने किया ऐलान

कोरोना के चलते जेईई मेन मई सत्र की परीक्षा स्थगित हो गई है.

नई दिल्ली:

JEE Main May 2021 Exam Postponed: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मई सत्र की संयुक्त प्रवेश परीक्षा मुख्य (JEE Main) को स्थगित कर दिया है. मई सत्र की परीक्षा 24 मई, 25, 26, 27 और 28 मई को आयोजित होने वाली थी. परीक्षा  को स्थगित करने का निर्णय कोरोनोवायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया गया है.

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए परीक्षा को स्थगित करने घोषणा की. उन्होंने लिखा, “कोविड -19 की मौजूदा स्थिति और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, जेईई (मुख्य) – मई 2021 सत्र को स्थगित कर दिया गया है. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे आगे के अपडेट के लिए NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर एक्टिव रहें.”

 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इस साल चार सत्रों में जेईई मेन 2021 परीक्षा का आयोजन कर रही है. इनमें से दो सत्र, फरवरी (सत्र 1) और मार्च (सत्र 2) में पहले ही पूरे हो चुके हैं. पहले सत्र में 6,20,978 छात्र शामिल हुए थे और दूसरे सत्र की परीक्षा में 5,56,248 छात्रों ने परीक्षा दी थी.





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Nearly 90 percent India Has High Positivity Rate, Rural Areas A Worry says Central Govt – कोरोना संकटः भारत के लिए खतरे की घंटी, देश के करीब 90% क्षेत्र में हाई पॉजिटिविटी रेट, ग्रामीण क्षेत्रों ने बढ़ाई चिंता

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Centre Plans Huge Positivity Drive To Offset Criticism Over Covid


Centre Plans Huge Positivity Drive To Offset Criticism Over Covid

कोरोना के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता.

नई दिल्ली:

कोरोने की दूसरी लहर भारत के लिए घातक साबित हुई है. देश के तकरीबन 90 फीसद हिस्से में कोरोना महामारी की उच्च सकारात्मकता दर (High Covid Positivity Rate) देखने को मिल रही है. केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि 734 में से 640 जिले में पॉजिटिविटी रेट 5 प्रतिशत से ज्यादा है जो कि राष्ट्रीय सीमा स्तर से ऊपर हैं. कोरोनो वायरस की घातक दूसरी लहर में सक्रिय केस की आसमान छूती रफ्तार से अस्पतालों और श्मशान घाटों का बुरा हाल है. गंभीर रूप से बीमार कोविड रोगियों के इलाज के लिए ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं की भारी कमी है.

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कोरोना के खतरे को बढ़ता देख पिछले महीने केंद्र ने 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल किया था. इस बीच ज्यादातर राज्यों ने वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होने की शिकायत की है. संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए अधिकारियों ने राज्यों को आगाह किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महामारी फैली तो यह तबाही मचा सकती है. 

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता, लव अग्रवाल ने कहा, “हिमाचल प्रदेश, नागालैंड जैसे नए राज्यों में हाई कोविड पॉजिटिविटी रेट देखी जा रही है. हमें संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए सुधारात्मक उपायों की जरूरत है.” इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भारत के ग्रामीण इलाकों पर विशेष ध्यान देने की बात कही है. साथ ही कोविड टेस्ट के लिए मानदंडों को संशोधित भी किया है. आईसीएमआर ने कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्ट के बजाय रैपिड एंटीजन टेस्ट्स पर ध्यान देना चाहिए. इससे स्थिति की सही जानकारी मिल सकेगी और संक्रमण की चेन को तोड़ने में भी मदद मिलेगी.

कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ कोविड मैनेजमेंट और राज्यों के रणनीति को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की. गौबा ने कहा कि इस वक्त टेली-परामर्श को बढ़ावा देने की जरूरत है. राज्यों से उप-केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, और स्वास्थ्य-कल्याण केंद्र स्तरों पर स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने का आग्रह किया. बैठक में कोविड मैनेजमेंट के लिए मानव संसाधन कार्यबल में सुधार के कदमों पर भी चर्चा की गई.

राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्राथमिकता दें: परीक्षण, नियंत्रण और बुनियादी ढांचा. आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्यों को गंभीर श्रेणी में आने वाले जिलों की पहचान करने के लिए कहा गया है, जिसमें पिछले सप्ताह कोविड पॉजिटिविटी रेट 10% या अधिक रही है. एक राज्य-स्तरीय नोडल अधिकारी ऐसे जिलों में 14 दिनों तक तैनात रहेगा. इसके साथ ही जिला कलेक्टरों को दैनिक स्थिति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी भी दी गई है.

इससे पहले की एक एडवाइजरी में सरकार ने राज्यों से उन इलाकों को बंद करने के लिए कहा था, जहां टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 10 फीसदी से ऊपर है. बताते चलें कि बीते महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामारी पर विराम लगाने के क्रम में कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करने, अंतिम उपाय के रूप में लॉकडाउन और मिनी कंटेनमेंट जोन का अनुसरण करने के लिए कहा था. 

तब से अधिकांश राज्यों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन या पाबंदियों को अपनाया है. पिछले 24 घंटों में भारत में 3.29 लाख नए मामले सामने आए हैं. इन नए मामलों के साथ भारत में अब तक 2.29 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं. 

कोरोना की चपेट में आते गांव, हरियाणा से ग्राउंड रिपोर्ट



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Dead bodies found in river, Panna district of Madhya Pradesh, villagers frightened – मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में नदी में मिले शव, गांव के लोग भयभीत

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Dead bodies found in river, Panna district of Madhya Pradesh, villagers frightened – मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में नदी में मिले शव, गांव के लोग भयभीत


Dead bodies found in river, Panna district of Madhya Pradesh, villagers frightened – मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में नदी में मिले शव, गांव के लोग भयभीत

प्रतीकात्मक फोटो.

भोपाल:

उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में तैरते हुए मिले शवों के बाद अब मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना (Panna) जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया है. पन्ना जिले की रूनज नदी में शव (Dead Bodies) मिले हैं.  पन्ना जिले के नंदनपुर गांव के लोग इस घटना से भयभीत हैं. ग्रामीण स्थानीय प्रशासन की मदद की प्रतीक्षा कर रहे हैं. नदी में पड़े शव सड़ चुके हैं. ग्रामीणों को यह शव कोरोना संक्रमित मरीजों के होने की आशंका है. हालांकि कलेक्टर ने कहा है कि केवल दो ग्रामीणों की मृत्यु कैंसर और वृद्धावस्था से हुई है.

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उल्लेखनीय है कि बिहार के बक्सर में कल शव तैरते हुए मिले थे. बिहार सरकार ने मंगलवार को कहा कि बक्सर जिले में गंगा से अब तक कुल 73 शव निकाले गए हैं जिनके कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के शव होने की आशंका जताते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि संभवतः अंतिम संस्कार नहीं करके उन्हें गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया होगा. बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने मंगलवार को अपने ट्वीट में बक्सर जिले में चौसा गांव के पास इन शवों के गंगा नदी में मिलने की चर्चा करते हुए कहा कि 4-5 दिन पुराने क्षत-विक्षत ये शव पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से बहकर बिहार आए हैं.

कोरोना काल में गंगा-यमुना नदी में बहते हुए मिले शव, केंद्रीय मंत्री बोले,’मामले को संज्ञान में ले जांच कराएं राज्‍य’

वहीं कई समाचार चैनलों ने दावा किया है कि ये शव उन कोरोना पीड़ितों के हैं जिनके परिवार के सदस्यों द्वारा गरीबी के कारण और संसाधन के अभाव में शव को छोड़ दिया गया या सरकारी कर्मी इस डर से कि वे कहीं स्वयं संक्रमण की चपेट में न आ जाएं, शवों को नदी में फेंक कर फरार हो गए.



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भारत में क्यों वेंटिलेटर की कमी से मर रहे हैं लोग?

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भारत में क्यों वेंटिलेटर की कमी से मर रहे हैं लोग?



आंध्र प्रदेश के तिरुपति के रुइया अस्पताल में आक्सीज़न की सप्लाई में बाधा…



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