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Due To Surge In COVID19 Assam Class 10 and 12 Board Exams Postponed – Assam Board Exams 2021: कोरोना के चलते असम 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा स्थगित, जानिए डिटेल

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Due To Surge In COVID19 Assam Class 10 and 12 Board Exams Postponed – Assam Board Exams 2021: कोरोना के चलते असम 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा स्थगित, जानिए डिटेल


Due To Surge In COVID19 Assam Class 10 and 12 Board Exams Postponed – Assam Board Exams 2021: कोरोना के चलते असम 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा स्थगित, जानिए डिटेल

असम 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा स्थगित हो गई हैं.

नई दिल्ली:

Assam Class 10 and 12 Board Exams Postponed: कोविड-19 के मामलों की तेजी से बढ़ती संख्या के मद्देनजर असम कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है. कक्षा 10वीं (HSLC) और कक्षा 12वीं (HS) की बोर्ड परीक्षाएं 11 मई से शुरू होने वाली थीं. लेकिन अब इन परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है. 

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सुरंजना सेनापति, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, असम (SEBA) के सचिव द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया, “असम राज्य में कोविड-19 की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 11 मई 2021 से शुरू होने वाली HSLC/AHM परीक्षा 2021 को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है.”

बयान में आगे कहा गया, राज्य स्वास्थ्य विभाग से परामर्श के बाद जल्द ही इन परीक्षाओं की संशोधित तारीखों की घोषणा की जाएगी.

असम हायर सेकेंडरी एजुकेशन काउंसिल (AHSEC) ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा को भी स्थगित करने का आदेश दिया है. AHSEC’ ने बयान जारी कर कहा, “कोविड-19 स्थिति के कारण 11 मई, 2021 से होने वाली उच्च माध्यमिक अंतिम परीक्षा 2021 को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है.”

राज्य भर के कई परीक्षा केंद्रों पर कक्षा 10वीं की प्रैक्टिकल परीक्षाएं 4 और 5 मार्च को आयोजित की जा चुकी हैं.

असम उच्च शिक्षा परिषद (AHSEC) ने पहले HS फर्स्ट ईयर की परीक्षा स्थगित करने की घोषणा की थी, जो 4 मई को शुरू होनी थी.



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Many other states including Delhi and Karnataka will purchase Covid vaccines through global tender – दिल्ली और कर्नाटक सहित कई अन्य राज्य ग्लोबल टेंडर के जरिए करेंगे वैक्सीन की खरीदी

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Many other states including Delhi and Karnataka will purchase Covid vaccines through global tender – दिल्ली और कर्नाटक सहित कई अन्य राज्य ग्लोबल टेंडर के जरिए करेंगे वैक्सीन की खरीदी


पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि “अभी भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास 90 लाख से अधिक COVID वैक्सीन के डोज उपलब्ध हैं.”

फिर भी कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अभी भी वैक्सीन की कमी का सामना करना पड़ रहा है. कई राज्य अब पहली डोज से अधिक, यह डोज ले चुके लोगों को दूसरी डोज देने को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि वैक्सीन का प्रभाव खत्म न हो जाए.

कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री और राज्य कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख सीएन अश्वथ नारायण ने कहा, “अब तक हम केंद्र द्वारा दी जाने वाली वैक्सीन पर निर्भर थे … अब हमें टेंडर जारी करने और सात दिनों के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है.” उनका राज्य 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों को टीका लगाने के लिए दो करोड़ डोज खरीदेगा.

आज एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित केंद्र राज्य सरकारों को ग्लोबल टेंडर आमंत्रित करने के लिए “मजबूर” कर रहा था. सिसोदिया ने कहा, “केंद्र सरकार ने एक सवाल उठाया … कि हम वैक्सीन की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर क्यों नहीं पास कर पाए हैं. केंद्र पहले से ही वैक्सीन का निर्यात कर रहा था जो कि भारत में इस्तेमाल की जा सकती थी. अब वह राज्यों के बीच कलह पैदा कर रहा है.” 

उन्होंने कहा कि “अगर राज्यों को वैश्विक निविदाओं के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैक्सीन खरीदने के लिए कहा जाता है तो सबसे बड़े और संपन्न राज्य अधिकतम संख्या में वैक्सीन की डोजों की गलत तरीके से खरीद करेंगे. इससे उनके बीच झगड़े होंगे…”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र को लिखे पत्र में,मांग की है कि सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशील्ड और भारत बायोटेक के कोवैक्सीन के टीके के फार्मूले को उत्पादन बढ़ाने के लिए अन्य कंपनियों के साथ साझा किया जाए.

वैक्सीन की कमी का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता आतिशी मार्लेना ने कहा था कि यदि वैक्सीन का स्टाक नहीं आया तो दिल्ली में कोवैक्सीन 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को जिन केंद्रों पर दी जा रही है वे मंगलवार की शाम के बाद बंद कर दिए जाएंगे.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना कोविड टीकों के लिए ग्लोबल टेंडर बुलाने की तैयारी में लगे हुए हैं. राज्य के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अनिल कुमार सिंघल के अनुसार आंध्र प्रदेश सरकार विदेशी निर्माताओं से वैक्सीन डोज लेने के लिए एक या दो दिन में संपर्क करने के लिए तैयार है.

सिंघल ने कहा कि “हम पहले ही स्पुतनिक वी वैक्सीन की खरीद के लिए एक आर्डर दे चुके हैं, लेकिन स्थानीय निर्माता डॉक्टर रेड्डीज़ लैबोरेटरीज ने कहा है कि वह उत्पादन क्षमता का आकलन करने के बाद 15 मई को आपूर्ति की स्थिति बता देगा.”

उत्तर प्रदेश ने पहले ही चार करोड़ डोज की खरीद की प्रक्रिया को हरी झंडी दिखा दी है. पीटीआई के अनुसार वह सीधे तौर पर स्पुतनिक वी जैसे टीकों की खरीद कर सकता है, जो कि मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा विकसित किए गए हैं.

ओडिशा के मुख्य सचिव एससी महापात्र ने कहा कि “ऐसा महसूस किया जाता है कि लोगों के कीमती जीवन की सुरक्षा के लिए पूर्ण टीकाकरण सबसे अच्छा तरीका है. इसलिए कैबिनेट ने राज्य सरकार को ग्लोबल टेंडर आमंत्रित करने और जल्द से जल्द टीके लगाने की अनुमति दी है”



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Nearly 90 percent India Has High Positivity Rate, Rural Areas A Worry says Central Govt – कोरोना संकटः भारत के लिए खतरे की घंटी, देश के करीब 90% क्षेत्र में हाई पॉजिटिविटी रेट, ग्रामीण क्षेत्रों ने बढ़ाई चिंता

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Nearly 90 percent India Has High Positivity Rate, Rural Areas A Worry says Central Govt – कोरोना संकटः भारत के लिए खतरे की घंटी, देश के करीब 90% क्षेत्र में हाई पॉजिटिविटी रेट, ग्रामीण क्षेत्रों ने बढ़ाई चिंता


Nearly 90 percent India Has High Positivity Rate, Rural Areas A Worry says Central Govt – कोरोना संकटः भारत के लिए खतरे की घंटी, देश के करीब 90% क्षेत्र में हाई पॉजिटिविटी रेट, ग्रामीण क्षेत्रों ने बढ़ाई चिंता

कोरोना के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता.

नई दिल्ली:

कोरोने की दूसरी लहर भारत के लिए घातक साबित हुई है. देश के तकरीबन 90 फीसद हिस्से में कोरोना महामारी की उच्च सकारात्मकता दर (High Covid Positivity Rate) देखने को मिल रही है. केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि 734 में से 640 जिले में पॉजिटिविटी रेट 5 प्रतिशत से ज्यादा है जो कि राष्ट्रीय सीमा स्तर से ऊपर हैं. कोरोनो वायरस की घातक दूसरी लहर में सक्रिय केस की आसमान छूती रफ्तार से अस्पतालों और श्मशान घाटों का बुरा हाल है. गंभीर रूप से बीमार कोविड रोगियों के इलाज के लिए ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं की भारी कमी है.

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कोरोना के खतरे को बढ़ता देख पिछले महीने केंद्र ने 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल किया था. इस बीच ज्यादातर राज्यों ने वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होने की शिकायत की है. संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए अधिकारियों ने राज्यों को आगाह किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महामारी फैली तो यह तबाही मचा सकती है. 

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता, लव अग्रवाल ने कहा, “हिमाचल प्रदेश, नागालैंड जैसे नए राज्यों में हाई कोविड पॉजिटिविटी रेट देखी जा रही है. हमें संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए सुधारात्मक उपायों की जरूरत है.” इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भारत के ग्रामीण इलाकों पर विशेष ध्यान देने की बात कही है. साथ ही कोविड टेस्ट के लिए मानदंडों को संशोधित भी किया है. आईसीएमआर ने कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्ट के बजाय रैपिड एंटीजन टेस्ट्स पर ध्यान देना चाहिए. इससे स्थिति की सही जानकारी मिल सकेगी और संक्रमण की चेन को तोड़ने में भी मदद मिलेगी.

कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ कोविड मैनेजमेंट और राज्यों के रणनीति को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की. गौबा ने कहा कि इस वक्त टेली-परामर्श को बढ़ावा देने की जरूरत है. राज्यों से उप-केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, और स्वास्थ्य-कल्याण केंद्र स्तरों पर स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने का आग्रह किया. बैठक में कोविड मैनेजमेंट के लिए मानव संसाधन कार्यबल में सुधार के कदमों पर भी चर्चा की गई.

राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्राथमिकता दें: परीक्षण, नियंत्रण और बुनियादी ढांचा. आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्यों को गंभीर श्रेणी में आने वाले जिलों की पहचान करने के लिए कहा गया है, जिसमें पिछले सप्ताह कोविड पॉजिटिविटी रेट 10% या अधिक रही है. एक राज्य-स्तरीय नोडल अधिकारी ऐसे जिलों में 14 दिनों तक तैनात रहेगा. इसके साथ ही जिला कलेक्टरों को दैनिक स्थिति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी भी दी गई है.

इससे पहले की एक एडवाइजरी में सरकार ने राज्यों से उन इलाकों को बंद करने के लिए कहा था, जहां टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 10 फीसदी से ऊपर है. बताते चलें कि बीते महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामारी पर विराम लगाने के क्रम में कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करने, अंतिम उपाय के रूप में लॉकडाउन और मिनी कंटेनमेंट जोन का अनुसरण करने के लिए कहा था. 

तब से अधिकांश राज्यों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन या पाबंदियों को अपनाया है. पिछले 24 घंटों में भारत में 3.29 लाख नए मामले सामने आए हैं. इन नए मामलों के साथ भारत में अब तक 2.29 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं. 

कोरोना की चपेट में आते गांव, हरियाणा से ग्राउंड रिपोर्ट



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Dead bodies found in river, Panna district of Madhya Pradesh, villagers frightened – मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में नदी में मिले शव, गांव के लोग भयभीत

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Dead bodies found in river, Panna district of Madhya Pradesh, villagers frightened – मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में नदी में मिले शव, गांव के लोग भयभीत


Dead bodies found in river, Panna district of Madhya Pradesh, villagers frightened – मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में नदी में मिले शव, गांव के लोग भयभीत

प्रतीकात्मक फोटो.

भोपाल:

उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में तैरते हुए मिले शवों के बाद अब मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना (Panna) जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया है. पन्ना जिले की रूनज नदी में शव (Dead Bodies) मिले हैं.  पन्ना जिले के नंदनपुर गांव के लोग इस घटना से भयभीत हैं. ग्रामीण स्थानीय प्रशासन की मदद की प्रतीक्षा कर रहे हैं. नदी में पड़े शव सड़ चुके हैं. ग्रामीणों को यह शव कोरोना संक्रमित मरीजों के होने की आशंका है. हालांकि कलेक्टर ने कहा है कि केवल दो ग्रामीणों की मृत्यु कैंसर और वृद्धावस्था से हुई है.

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उल्लेखनीय है कि बिहार के बक्सर में कल शव तैरते हुए मिले थे. बिहार सरकार ने मंगलवार को कहा कि बक्सर जिले में गंगा से अब तक कुल 73 शव निकाले गए हैं जिनके कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के शव होने की आशंका जताते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि संभवतः अंतिम संस्कार नहीं करके उन्हें गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया होगा. बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने मंगलवार को अपने ट्वीट में बक्सर जिले में चौसा गांव के पास इन शवों के गंगा नदी में मिलने की चर्चा करते हुए कहा कि 4-5 दिन पुराने क्षत-विक्षत ये शव पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से बहकर बिहार आए हैं.

कोरोना काल में गंगा-यमुना नदी में बहते हुए मिले शव, केंद्रीय मंत्री बोले,’मामले को संज्ञान में ले जांच कराएं राज्‍य’

वहीं कई समाचार चैनलों ने दावा किया है कि ये शव उन कोरोना पीड़ितों के हैं जिनके परिवार के सदस्यों द्वारा गरीबी के कारण और संसाधन के अभाव में शव को छोड़ दिया गया या सरकारी कर्मी इस डर से कि वे कहीं स्वयं संक्रमण की चपेट में न आ जाएं, शवों को नदी में फेंक कर फरार हो गए.



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