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World Thalassaemia Day 2021: What is thalassaemia? | Causes and Types Date, Theme, History and Significance

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World Thalassaemia Day 2021: What is thalassaemia? | Causes and Types Date, Theme, History and Significance


World Thalassaemia Day 2021: What is thalassaemia? | Causes and Types Date, Theme, History and Significance

थैलेसीमिया एक ऐसा रोग है, जो आमतौर पर बच्चे में जन्म से ही होता है. यह एक वंशानुगत रोग यानी हेरेडिटरी है, जो जीन के माध्यम से माता-पिता से बच्चे में आता है. थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है. एक माइनर थैले‍सीमिया और दूसरा मेजर थैलेसीमि‍या. माइनर थैलेसीमिया वाले बच्चों में खून कभी भी सामान्य के स्तर तक नहीं पहुंच पाता यह हमेशा कम रहता है, लेकिन ये स्वस्थ जीवन जी लेते हैं. वहीं, मुश्किल बड़ी मेजर थैलेसीमिया वाले बच्चों के लिए होती है. उन्हें लगभग हर 21 दिन या हर महीने खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है.


क्या होता है थैलेसीमिया?

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क्योंकि थैलेसीमिया एक तरह का रक्त विकार यानी ब्लड डिसऑर्डर है. तो सबसे पहले समझते हैं खून को. ये तो हम सबको पता है कि खून पतला तरल पदार्थ है, जो हमारी नसों में दौड़ता है. यह गाढ़ा, कुछ चिपचिपा और लाल रंग का तरल द्रव्य है. खून को एक जीवित ऊतक यानी living tissue माना जाता है. द्वारका के मणिपाल हॉस्पिटल में रेस्पिरेटरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ पुनीत खन्ना से एक व‍ीडियो के दौरान बातचीत में हमें बताया था कि इंसान के खून में दो चीजों से मिलकर बना है. एक ब्लड सेल्स और दूसरी प्लाज्मा. ब्लड सेल्स तीन तरह के होते हैं पहले रेड ब्लड सेल, दूसरी वाइट ब्लड सेल, तीसरी प्लेट्लेट्स. प्लाज्मा खून का लिक्व‍िड पार्ट है. इसी में ब्ल्ड सेल्स तैर कर शरीर के अंगों तक पहुंचते हैं. इतना ही नहीं प्लाज्मा ही आंतों से अवशोषित पोषक तत्वों को शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाता है. यानी शरीर के हर अंग तक उसका भोजन पहुचाने का काम प्लाज्मा करता है यानी की प्लाज्मा ही आपके अंदर की दुनिया का स्वीगी डीलि‍वरी एजेंट है. 

खैर ये तो हो गई आपके जीके की बात. अब प्लाज्मा से हट कर लौटते हैं थैलेसीमिया पर. ब्लड के सबसे कर्मठ कर्मचारी 

इसमें लाल रक्त कणिकाएं यानी रेड ब्लड सेल्स होते हैं. ये शरीर के हर अंग तक आक्सीजन पहुंचाते हैं. ये रेड ब्लड सेल्स बोन मैरो लगातार बनाता रहता है. इनकी एक उम्र होती है, जो कुछ दिनों से लेकर 120 दिनों तक मानी जाती है. इसके बाद ये सेल्स ब्रेक हो जाते हैं. रेड ब्लड सेल्स के ब्रेक होने का प्रोसेस शरीर में एक तय अनुपात में चलता रहता है. आपका शरीर इस अनुपात को बरकरार रखता है, ताकी शरीर में खून की कमी न हो. लेकिन जब ये रेड ब्लड सेल्स सही तरीके से नहीं बनते या उनकी उम्र सामान्य से बहुत कम होती है यानी ये बहुत ही कम समय में ब्रेक हो जाते हैं तो इससे थैले‍सीमिया की स्थि‍ति पैदा होती है.

कैसे होता है थैलेसीमिया

बच्चे को माइनर थैलेसीमिया होगा या मेजर थैलेसीमिया यह पूरी तरह से उसके माता पिता क्रोमोजोम पर निर्भर होता है. अगर मां या पिता दोनों में से किए एक के शरीर में मौजूद क्रोमोजोम खराब होते हैं, तो बच्चे मे माइनर थैलेसीमिया की संभावना बढ़ती है. वहीं, मां और पिता दोनों के ही क्रोमोजोम खराब हो जाते हैं, तो यह मेजर थैलेसीमिया की स्थिति पैदा कर देता है. ऐसा होने पर बच्चे में जन्म के तीन से 6 महीने के बाद खून बनना बंद हो सकता है. 

अब ये समझ लेते हैं कि थैलेसीमिया में शरीर के अंदर होता क्या है 

थैलेसीमिया रोगी के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण सामान्य गति से नहीं हो पाता या जो रेड सेल्स बनते हैं या शरीर में मौजूद रहते हैं वे भी बहुत जल्दी ब्रेक हो जाते हैं यानी उनकी उम्र कम रहती है. ऐसे में यह शरीर की जरूरत के मुताबिक रेड ब्ल्ड सेल्स न बनने से शरीर के अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्स‍ीजन नहीं पहुंचता और कई दूसरी तरह की परेशानियां हो सकती है. 

बार-बार चढ़ाना पड़ता है खून 

दुखद है कि जिन बच्चों में थैलेसीमिया रोग होता है वे बहुत उम्र नहीं देख पाते. आमतौर पर जो लंबी उम्र तक जीव‍ित होते हैं वे भी उतने सेहतमंद या दुरुस्त नहीं होते. शरीर में रेड ब्लड सेल्स की तकरीबन 120 दिन होती है. लेकिन थैलेसीमिया के मरीजों में यह करीब-करीब 20 दिन की होती है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इन लोगों को हर 21 दिन बाद खून चढ़ाया जाए. 

क्यों और किसे होता है थैलेसीमिया?

असल में थैलेसीमिया एक वंशानुगत रोग है. यह माता-पिता से बच्चों में आता है. ऐसी कई जांच भी मौजूद हैं. जिनसे यह पता लगाया जा सकता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे में इसके होने की कितनी संभावना है. माता या पिता किसी एक को भी थैलेसीमिया है, तो गर्भ से ही बच्चा इस रोग से ग्रस्त हो सकता है. वहीं अगर माता-पिता दोनों ही माइनर थैलेसीमिया से पीडि़त हैं, तो भी बच्चे में मेजर थैलेसीमिया होने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

क्योंकि यह एक वंशानुगत रोग है, तो इससे बचा कैसे जाए

इससे बचने के लिए जरूरी है कि अगर माता या पिता में से किसी एक को भी मेजर थैलेसीमिया है, तो वे डॉक्टरी निगरानी में बच्चा प्लान करें. 

शादी से पहले लड़का और लड़की को अपने ब्लड टेस्ट करवा कर यह सुनिश्च‍ित करना चाहिए कि वे दोनों ही माइनर थैलेसीमिया से पीडि़त न हों.

माता या पिता में से किसी एक को भी मेजर थैलेसीमिया है, तो गर्भधारण के चार महीने के अंदर भ्रूण की जांच कराई जा सकती है.

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शेयर बाजार में आज उछाल के साथ ओपनिंग.

मुंबई:

बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स गुरुवार को कारोबार की शुरुआत में 150 अंक से अधिक चढ़कर 48,850 अंक से ऊपर निकल गया. सूचकांक में बड़ा वजन रखने वाले एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, आईटीसी और बजाज फाइनेंस के शेयरों में बढ़त से सूचकांक चढ़ा है. बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का 30- कंपनी शेयरों पर आधारित सेंसेक्स शुरुआती दौर में 174.54 अंक यानी 0.36 प्रतिशत बढ़कर 48,852.09 अंक पर पहुंच गया. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इस दौरान 69.05 अंक यानी 0.47 प्रतिशत बढ़कर 14,686.90 अंक पर पहुंच गया.

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सेंसेक्स में शामिल शेयरों में बजाज आटो सबसे ज्यादा लाभ में रहा. इसका शेयर दो प्रतिशत से भी अधिक चढ़ गया. इसके बाद बजाज फाइनेंस, आईटीसी, एचडीएफसी, टाइटन, मारुति और महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा के शेयरों में भी लाभ दर्ज किया गया. इसके उलट एचसीएल टेक, सन फार्मा, भारती एयरटेल और पावर ग्रिड के शेयरों में गिरावट का रुख रहा.

इससे पिछले कारोबारी सत्र में बीएसई सेंसेक्स 424.04 अंक यानी 0.88 प्रतिशत बढ़कर 48,677.55 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 121.35 अंक यानी 0.84 प्रतिशत बढ़कर 14,617.85 अंक पर पहुंच गया.

विदेशी संस्थागत निवेशक बाजार में शुद्ध बिकवाल बने हुये हैं. बुधवार को उन्होंने 1,110.50 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की. वहीं इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 240.61 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की.

एशिया के अन्य बाजारों में हांग कांग, टोक्यो और सोल में सकारात्मक रुख रहा वहीं शंघाई में गिरावट का रुख देखा गया.इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 0.10 प्रतिशत बढ़कर 69.03 डालर प्रति बैरल पर बोला गया.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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Oxygen Supply in Delhi: Corona Patients living in home isolation will get oxygen by applying on the portal of Delhi government – होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को दिल्ली सरकार के पोर्टल पर आवेदन कर मिलेगी ऑक्सीजन, इन चीजों की पडे़गी जरूरत

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Oxygen Supply in Delhi: Corona Patients living in home isolation will get oxygen by applying on the portal of Delhi government – होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को दिल्ली सरकार के पोर्टल पर आवेदन कर मिलेगी ऑक्सीजन, इन चीजों की पडे़गी जरूरत


Oxygen Supply in Delhi: Corona Patients living in home isolation will get oxygen by applying on the portal of Delhi government – होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को दिल्ली सरकार के पोर्टल पर आवेदन कर मिलेगी ऑक्सीजन, इन चीजों की पडे़गी जरूरत

होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज ऑक्सीजन के लिए दिल्ली सरकार के पोर्टल पर कर सकते हैं आवेदन.

नई दिल्ली:

कोरोना की दूसरी लहर में दिल्ली में ऑक्सीजन की बड़ी किल्लत देखने को मिली. ऑक्सीजन की कमी के चलते कई मरीज़ों ने दम तोड़ दिया और कई मरीज इस बीमारी से जंग लड़ रहे हैं. ऑक्सीजन की किल्लत के बीच अब एक राहत की खबर सामने आई है. होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर सुचारू रूप से मिल सके, इसके लिए दिल्ली सरकार ने सिस्टम बनाया है. जिन लोगों/परिजनों को होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों के लिए ऑक्सीजन चाहिए, वो दिल्ली सरकार के पोर्टल https://delhi.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं.

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ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए इन चीजों की पडे़गी जरूरत

ऑक्सीजन के लिए आवेदन के साथ फ़ोटो, आधार कार्ड, कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट जैसी जानकारी भी अपलोड करनी होंगी. अगर किसी मामले में CT स्कैन की रिपोर्ट है, तो उसको भी अपलोड कर सकते हैं, ताकि यह बात बताई जा सके कि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत है.

इस संबंध में सभी जिलों के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को कहा गया है कि जो भी आवेदन ऑक्सीजन के लिए आएं, उसकी छंटाई के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी लगाए जाएं और जो लोग ऑक्सीजन पाने के पात्र हों उनको ई-पास टॉप प्रायऑरिटी पर जारी किया जाए.

ऑक्सीजन की जरूरत वाले लोगों को DM की तरफ से जारी हुआ पास भी मिलेगा, जिसमें यह लिखा होगा कि किस तारीख को, किस जगह, किस समय और किस डिपो पर ऑक्सीजन सिलेंडर मिलेगा. यह स्टॉक की उपलब्धता पर निर्भर करेगा. 

डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे डिपो या डीलर रखे जाएं, जहां पर जाकर व्यक्ति को ऑक्सीजन सिलेंडर सीधा मिल जाए. उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह व्यक्ति को कहीं और सिलेंडर भरवाने के लिए भेज दें.

बता दें कि दिल्ली में ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाने के लिए अलग-अलग जगहों और रिफिलिंग सेंटर पर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं, जिसके मद्देनजर दिल्ली सरकार ने यह आदेश जारी किया है. औपचारिक आदेश के मुताबिक, गुरुवार 6 मई से दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर आवेदन किए जा सकते हैं.



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Student Funny Reaction On Giving Offline Exam After Taking Online Classes See Viral Video – ऑनलाइन क्लास के बाद परीक्षा देने पहुंचा स्टूडेंट, बोला- पबजी खेलने के बाद आर्मी ज्वाइन करने जैसा

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Student Funny Reaction On Giving Offline Exam After Taking Online Classes See Viral Video – ऑनलाइन क्लास के बाद परीक्षा देने पहुंचा स्टूडेंट, बोला- पबजी खेलने के बाद आर्मी ज्वाइन करने जैसा


Student Funny Reaction On Giving Offline Exam After Taking Online Classes See Viral Video – ऑनलाइन क्लास के बाद परीक्षा देने पहुंचा स्टूडेंट, बोला- पबजी खेलने के बाद आर्मी ज्वाइन करने जैसा

ऑनलाइन पढ़ाई के बाद परीक्षा देने पहुंचा स्टूडेंट को आया गुस्सा, कह डाली ऐसी बात – देखें Video

सोशल मीडिया (Social Media) पर परीक्षा देने पहुंचे एक स्टूडेंट (Student) का वीडियो तेजी से वायरल (Viral Video) हो रहा है, जिसमें वो बता रहा है कि ऑनलाइन क्लास लेने के बाद ऑफलाइन परीक्षा देना कितना मुश्किल हो रहा है. आईपीएस ऑफिसर रुपिन शर्मा (IPS Officer Rupin Sharma) ने इस वीडियो को शेयर किया है. कोरोनावायरस के चलते स्कूल-कॉलेज को बंद कर दिया गया था, ऐसे में बच्चों ने पूरे साल ऑनलाइन पढ़ाई की, लेकिन परीक्षा के लिए उनको एग्जाम हॉल तक आना पड़ा.

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वीडियो में एक स्टूडेंट कहता है, ‘ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद ऑफलाइन परीक्षा देना ऐसा जैसे पबजी खेलने के बाद आर्मी ज्वाइन करना होगा.’ आईपीएस ऑफिसर रुपिन शर्मा ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, ‘परीक्षा, आर्मी और पबजी.’

देखें Video:

इस वीडियो को उन्होंने 5 मई को शेयर किया था, जिसके अब तक 2 हजार से ज्यादा व्यूज हो चुके हैं. साथ ही कई लाइक्स और रि-ट्वीट्स हो चुके हैं. लोगों को यह वीडियो काफी पसंद आ रहा है. लोगों ने कमेंट सेक्शन में ऐसे रिएक्शन्स दिए हैं…





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